बाअमल आलिम, डाक्टर, इंजिनियर, आईएस, पीसीएस व जज पैदा करो: सैयद अमीन मियां
Varanasi (barkati news). रेवड़ीतालाब में तरक्की-ए-अहले अहले सुन्नत के मैदान में बज़्मे कासमी बरकाती का जलसा अकीदत के साथ हुआ। जलसे में खानकाह मारहरा शरीफ के सज्जादा नशीन ताजुल मशाईख हजरत सैय्यद शाह डा. अमीन मियां कादरी बरकाती मारहरवी ने कहा कि तालीम के बिना कोई भी कौम तरक्की नही कर सकती. आज हमारे जो हालात है उसकी असल वजह यही है कि हमने अपने नबी का रास्ता छोड दिया, बुज़ुर्गो की बातो को नज़र अंदाज़ कर दिया. नबी ने कहा है कि इल्म हासिल करना हो तो चीन तक जाओ. नबी ने उस दौर में यह बात कहा जब अरब से चीन जाना बहुत दुश्वारी भरा काम था मगर आज गली गली में तालीम मिल रही है, स्कूल, मदरसो से लेकर हायर एजुकेशन तक की तालीम आपके अपने शहर में है फिर भी उच्च स्तरीय शिक्षा की ओर मुसलमानों का रुझान जितना होना चाहिए नही हो रहा है मैं सभी मुसलमानों से कहता हूं कि अगर आप देश और देशवासियों का भला चाहते हैं तो ट्रस्ट बनाकर उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थान खोलिए और मुस्लिम बच्चों को ठोस व बा अमल आलिम डाक्टर, इंजिनियर, आईएस, पीसीएस व जज बनाओ।
ये बातें उन्होंने मंगलवार को रेवड़ीतालाब स्थित तरक्की-ए-अहले अहले सुन्नत के मैदान (बैतुस्सलाम) में बज़्मे कासमी बरकाती के तत्वधान में होने वाले जश्ने ईद मीलादुन्नबी को खेताब करते हुए कही. उन्होने कहा कि अब भी वक्त है अपने बच्चों को तालीम दो, भले ही आधी रोटी खाओ मगर बच्चों को पढ़ाओ. जलसे में उनके शहजादे व उनके वलिये अहद हजरत सैय्यद अमान मियां बरकाती ने कहा कि कुछ ताकते हमारे मुल्क को खोख्ला करने में लगी हुई है. उनके नापाक मंसूबे से हमे होशियार रहने कि ज़रुरत है, क्यों की इस्लाम कहता है कि मुल्क से मोहब्ब्त इमान का हिस्सा है. उन्होने मुल्क में अमन, आपसी मोहब्ब्त और सौहार्द के साथ रहने कि हिदायत दी. हज़रत मौलाना सैय्यद नूर आलम अलीगढ़ ने नबी की सुन्न्त और मिलाद पर रौशनी डाली जबकि जयपुर राजस्थान से आए मशहूर शायर इमरान रजा बरकाती ने नाते नबी से लोगो को देर रात तक बांधे रखा.
इस दौरान मौलाना अजहरुल कादरी बरकाती उस्ताद मदरसा खानम जान ने बताया कि हजरत अमीन मियाँ से जलसे में भारी तादाद में पूर्वांचल के अकीदतमन्द मिलने पहुंचे और बरकाती सिलसिले में मुरीद हुए. इस जलसे में खास तौर से मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी, बीएचयू के प्रोफेसर डॉक्टर अफजल अहमद मिस्बाही, मौलाना मोईनुद्दीन अहमद फारूकी (प्यारे मियां), मौलाना इलियास मिस्बाही, कारी अबुशहमा, मौलाना याकूब के अलावा सैंकड़ों उलमा व मस्जिदों के इमाम उपस्थित रहे.


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