मंगलवार, 7 नवंबर 2023

मुर्दों को भी जिंदा कर दिया करते थे गौसे आज़म

लंगरे गौसिया में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम 


Varanasi (Barkati news). हजरत शेख अब्दुल कादिर जिलानी रहमतुल्ला अलैह गौसे आज़म को रब ने वो ताकत दी थी कि वो मुर्दों को भी जिंदा कर दिया करते थे। यही वजह है कि वलियों के सरदार गौसे पाक के पास एक बार एक खातून हाजिर हुई, तो देखा कि गौसे पाक आराम से अच्छा-अच्छा खाना खा रहे हैं और उस खातून का बेटा सूखी रोटी खा रहा है, यह देखकर खातून को बहुत गुस्सा आया उसने गौस पाक से कहा मैंने तो आपके पास बेटे को इसलिए भेजा था कि वो आपकी तरह बन सके मगर आप उसे सूखी रोटी खिला रहे हैं और खुद मुर्ग मुसल्लम खा रहे हैं। इस पर गौसे आज़म ने वहां रखी मुर्गे की हड्डी की तरफ देखा और इशारा किया, इशारा पाते ही हड्डी मुर्गा बन गया। यह देखकर खातून चौकी, गौसे आज़म ने कहा परेशान न हों आप, अभी आपके साहबजादे का दिन सूखी रोटी खाने का है जिस दिन वो तालीम पूरी कर लेगा, ऐसे ही वो मुर्गा खाएगा और हड्डियों से मुर्गा बना देगा। खातून को सब कुछ समझ में आ गया और वो अपने बेटे से मिलकर चली गई। ऐसे हैं सरकार गौसे आज़म। सरकार गौसे आज़म की याद में इन दिनों जगह जगह लंगरे गौसिया का एहतमाम किया जा रहा है। अर्दली बाजार में मौलाना अजहरुल कादरी के दौलतखाने पर मुफ्ती महमूद आलम ने लंगरे गौसिया में जुटे लोगों को खेताब करते हुए सरकार गौसे आज़म की जिंदगी, उनके करामात पर जहां रौशनी डाली वहीं मौलाना इल्यास कादरी, मौलाना सलाउद्दीन, हाफिज अली रजा, हाफिज हाजी मसरुर व हाफिज तहसीन रजा आदि ने मिलाद पढ़ा। ऐसे ही हशमतुललाह राजू के दौलतखाने पर लंगरे गौसिया में सैकड़ों लोगों ने गौसे आज़म का तबर्रुक चखा। देर रात तक मिलाद, फातेहा के बाद लोगों ने लजीज बिरयानी का लुत्फ उठाया।

शनिवार, 14 अक्टूबर 2023

Anjuman तबलीग अहले सुन्नत के जलसे में पेश हुआ नातिया कलाम

बज़्म रबीउन नूर व जश्न मुजाहिदे मिल्लत में उलेमा की हुई तकरीर 



Varanasi (barkati news). अंजुमन तबलीग अहले सुन्नत व दावते नमाज की ओर से गौरीगंज चौराहे पर बज़्म रबी उननूर व जश्ने हुजूर मुजाहिदे मिल्लत का दो दिनी जलसे में उलेमाओं ने जहां नबी की जिंदगी, इल्म और मुल्क में अमन और मिल्लत पर रौशनी डाली वहीं हुजूर मुजाहिदे मिल्लत की दीनी ख़िदमात पर भी तजकरा चला. उलेमा ने कहा कि हुजूर मुजाहिदे मिल्लत ने इल्म और दीन की जो शमां रौशन की थी, उससे तमाम लोग आज न सिर्फ फायदा उठा रहे हैं बल्कि रहती दुनिया तक फायदा उठाते रहेंगे. इस दौरान शायरों ने नातिया कलाम से लोगों को देर रात तक बांधे रखा. जलसे की सदारत शहर काजी मौलाना गुलाम यासीन साहब कर रहे थे. लोगों का स्वागत मौलाना गुलाम मुस्तफा खान हबीबी ने किया तो शुक्रिया हाजी गुलाम गौस ने कहा.

गुरुवार, 5 अक्टूबर 2023

ट्रस्ट बनाकर दीनी व दुनियावी शिक्षा के मदरसे व स्कूल कॉलेज बनाओ

बाअमल आलिम, डाक्टर, इंजिनियर, आईएस, पीसीएस व जज पैदा करो: सैयद अमीन मियां 



Varanasi (barkati news). रेवड़ीतालाब में तरक्की-ए-अहले अहले सुन्नत के मैदान में बज़्मे कासमी बरकाती का जलसा अकीदत के साथ हुआ। जलसे में खानकाह मारहरा शरीफ के सज्जादा नशीन ताजुल मशाईख हजरत सैय्यद शाह डा. अमीन मियां कादरी बरकाती मारहरवी ने  कहा कि तालीम के बिना कोई भी कौम तरक्की नही कर सकती. आज हमारे जो हालात है उसकी असल वजह यही है कि हमने अपने नबी का रास्ता छोड दिया, बुज़ुर्गो की बातो को नज़र अंदाज़ कर दिया. नबी ने कहा है कि इल्म हासिल करना हो तो चीन तक जाओ. नबी ने उस दौर में यह बात कहा जब अरब से चीन जाना बहुत दुश्वारी भरा काम था मगर आज गली गली में तालीम मिल रही है, स्कूल, मदरसो से लेकर हायर एजुकेशन तक की तालीम आपके अपने शहर में है फिर भी उच्च स्तरीय शिक्षा की ओर मुसलमानों का रुझान जितना होना चाहिए नही हो रहा है मैं सभी मुसलमानों से कहता हूं कि अगर आप देश और देशवासियों का भला चाहते हैं तो ट्रस्ट बनाकर उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थान खोलिए और मुस्लिम बच्चों को ठोस व बा अमल आलिम डाक्टर, इंजिनियर, आईएस, पीसीएस व जज बनाओ।

        ये बातें उन्होंने मंगलवार को रेवड़ीतालाब स्थित तरक्की-ए-अहले अहले सुन्नत के मैदान (बैतुस्सलाम) में बज़्मे कासमी बरकाती के तत्वधान में होने वाले जश्ने ईद मीलादुन्नबी को खेताब करते हुए कही. उन्होने कहा कि अब भी वक्त है अपने बच्चों को तालीम दो, भले ही आधी रोटी खाओ मगर बच्चों को पढ़ाओ. जलसे में उनके शहजादे व उनके वलिये अहद हजरत सैय्यद अमान मियां बरकाती ने कहा कि कुछ ताकते हमारे मुल्क को खोख्ला करने में लगी हुई है. उनके नापाक मंसूबे से हमे होशियार रहने कि ज़रुरत है, क्यों की इस्लाम कहता है कि मुल्क से मोहब्ब्त इमान का हिस्सा है. उन्होने मुल्क में अमन, आपसी मोहब्ब्त और सौहार्द के साथ रहने कि हिदायत दी. हज़रत मौलाना सैय्यद नूर आलम अलीगढ़ ने नबी की सुन्न्त और मिलाद पर रौशनी डाली जबकि जयपुर राजस्थान से आए मशहूर शायर इमरान रजा बरकाती ने नाते नबी से लोगो को देर रात तक बांधे रखा. 

इस दौरान मौलाना अजहरुल कादरी बरकाती उस्ताद मदरसा खानम जान ने बताया कि हजरत अमीन मियाँ से जलसे में भारी तादाद में पूर्वांचल के अकीदतमन्द मिलने पहुंचे और बरकाती सिलसिले में मुरीद हुए. इस जलसे में खास तौर से मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबी, बीएचयू के प्रोफेसर डॉक्टर अफजल अहमद मिस्बाही, मौलाना मोईनुद्दीन अहमद फारूकी (प्यारे मियां), मौलाना इलियास मिस्बाही, कारी अबुशहमा, मौलाना याकूब के अलावा सैंकड़ों उलमा व मस्जिदों के इमाम उपस्थित रहे.

बुधवार, 14 अप्रैल 2021

रमज़ान का पैगाम-2 (15.4.2021)


रमजान की रूहानी चमक से फिर रोशन हुई दुनिया

मोहम्मद रिज़वान

वाराणसी (बरकाती न्यूज़). बंदे को हर बुराई से दूर रखकर अल्लाह के नजदीक लाने का मौका देने वाले पाक महीना रमजान की रूहानी चमक से दुनिया एक बार फिर रोशन हो चुकी हैऔर फिजा में घुलती अजान और दुआओं में उठते हाथ खुदा से मुहब्बत के जज्बे कि मिसाल पेश कर रहे हैं। दौड़-भाग और खुदगर्जी भरी जिंदगी के बीच इंसान को अपने अंदर झांकने और खुद को अल्लाह की राह पर ले जाने की प्रेरणा देने वाले रमजान माह में भूख-प्यास समेत तमाम शारीरिक इच्छाओं तथा झूठ बोलनेचुगली करनेखुदगर्जीबुरी नजर डालने जैसी सभी बुराइयों पर लगाम लगाने की मुश्किल कवायद रोजेदार को अल्लाह के बेहद करीब पहुंचा देती है।

रमजान की फजीलत

माहे रमजान में रोजेदार अल्लाह के नजदीक आने की कोशिश के लिए भूख-प्यास समेत तमाम इच्छाओं को रोकता है। बदले में अल्लाह अपने उस इबादत गुजार रोजेदार बंदे के बेहद करीब आकर उसे अपनी रहमतों और बरकतों से नवाजता हैइस्लाम की पांच बुनियादों में रोजा भी शामिल है और इस पर अमल के लिए ही अल्लाह ने रमजान का महीना मुकर्रर किया है। खुद अल्लाह ने कुरान शरीफ में इस महीने का जिक्र किया है। रमजान इंसान के अंदर जिस्म और रूह है। आम दिनों में उसका पूरा ध्यान खाना-पीना और दीगर जिस्मानी जरूरतों पर रहता है लेकिन असल चीज उसकी रूह है। इसी की तरबीयत और पाकीजगी के लिए अल्लाह ने रमजान बनाया है रमजान में की गई हर नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इस महीने में एक रकात नमाज अदा करने का सवाब 70 गुना हो जाता है। साथ ही इस माह में दोजख  के दरवाजे भी बंद कर दिए जाते हैंजन्नत के दरवाज़े खोल दिये जाते है।

रमज़न के तीन अशरे

अमूमन 30 दिनों के रमजान माह को 10-10 दिन केे तीन अशरों में बांटा गया है। पहला अशरा रहमत’ का है। इसमें अल्लाह अपने बंदों पर रहमत की दौलत लुटाता है। दूसरा अशरा बरकत’ का है जिसमें खुदा बरकत नाजिल करता है जबकि तीसरा अशरा मगफिरत’ का है। इस अशरे में अल्लाह अपने बंदों को गुनाहों से पाक कर देता है।

इस माह  की विशेषताएं

महीने भर के रोज़े  रखनारात में तरावीह की नमाज़ पढनाक़ुरान की तिलावत करनाएतेकाफ़ में बैठनाअल्लाह से दुआ मांगनाज़कात देनाअल्लाह का शुक्र अदा करना। इसीलिये इस माह को नेकियों और इबादतों का महीना माना जाता है। तरावीह की नमाज़ में महीना भर कुरान पढना। जिससे क़ुरान पढना न आने वालों को क़ुरान सुनने का सबाब ज़रूर मिलता है।रमजान को नेकियों का मौसम-ए-बहार  कहा गया है। रमजान को नेकियों का मौसम भी कहा जाता है। इस महीने में मुसलमान अल्लाह की इबादत ज्यादा करता है। अपने अल्लाह को खुश करने के लिए रोजो के साथकुरआनदान धर्म करता है यह महीना समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का हैइस महीने के गुज़रने के बाद शव्वाल की पहली तारीख को ईद उल-फ़ित्र मनाते हैं। यानी जिसने माह भार रोज़ा रखा ईद उसी की है। या हर मुुसलमान को रोज़ा रखने कि तौफीक देेेआमीन।

इन नम्बरों पर होगी आपकी रहनुमाई

रमज़ान के लिए अगर आपके ज़ेहन में कोई सवाल है तो आपकी रहनुमाईके लिए उलेमा मौजूद हैं। इन नम्बरों पर बात करके आप अपनी दुश्वारी का हल निकाल सकते हैं। 

9415996307, 9450349400, 7505032681, 9026118428,  9554107483 

ख्वातीन मस्जिद में एतेकाफ कर सकती हैं या नही ?

मुन्नू खां ने नवापुरा से फोन किया क्या ख्वातीन मस्जिद में एतेकाफ कर सकती हैंइस पर उलेमा ने जवाब दिया कि ख्वातीन को मस्जिद में एतेकाफ का हुक्म नहीं हैखास कर अहले सुन्नत वल जमात से इत्तेफाक रखने वाली ख्वातीन को। ख्वातीन घर के एक हिस्से में एतेकाफ पर बैठ सकती हैं। वाज़े ने फोन किया कि रोज़े की हालत में सिर पर तेल का इस्तेमाल किया तो रोज़ा होगा या नहींजवाब में उलेमा ने कहा कि तेल लगानेसुरमा लगानेखुशबू सूंघने से रोज़ा नहीं टूटता ये पहले भी बताया जा चुका है।  बाबू फारुकी ने सवाल किया कि रात में सो गया सहरी में नींद नहीं खुलीइसलिए कुछ सहरी नहीं कर सकाआंख खुली तो सुबह हो गयी थीबिना सहरी के ही मैं रोज़ा रह गयामेरा रोजा हुआ या नहींजवाब था किजी हां रोज़ा हो जायेगासहरी करना सुन्नत है अनजाने में सहरी छूट गयी तो कोई हर्ज नहीं है। रमज़ान हेल्प लाईन में आये सवालो का जवाब मुफ्ती बोर्ड के सदर मौलाना अब्दुल हादी खां हबीबीसेक्रेटरी मौलाना हसीन अहमद हबीबीमौलाना अज़हरुल कादरी ने दिया।

इन नम्बरों पर होगी आपकी रहनुमाई

इन नम्बरों पर बात करके आप अपनी दुश्वारी का हल निकाल सकते हैं। मोबाइल नम्बर ये है- 9415996307, 9450349400, 9026118428,  9554107483

मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

रमज़ान 2021: सारी दुनिया में एक साथ मनायी जाती है रमज़ान की खुशी

रब देता है रमज़ान में गुनाह माफ करने का पूरा पूरा मौका 

Varanasi (barkati news) अल्लाह ने उम्मते मोहम्मदिया को रमज़ान का वो मुबारक महीना अता फरमाया है, जिसमें गुनाहगारों को अपनी गुनाह माफ कराने का पूरा-पूरा मौका मिलता है। दुनिया का ये ऐसा अकेला महीना है, जिसके आने की खुशी एक साथ पूरी दुनिया में रूहानी तौर पर मनायी जाती है। शाबान की 15 तारीख से इसका इंतेज़ार शुरू हो जाता है जो 29 शाबान के चांद रात के दिन अपने शबाब पर होती है। चांद होते ही रमज़ान की तरावीह शुरू होती है और चांद देखकर ही तरावीह खत्म की जाती है। रमज़ान इंसानियत और दूसरों से हमदर्दी रखने की सीख देता है। इस महीने में तिलावते कुरान शरीफ पूरी दुनिया में की जाती है जिससे दुनिया में खुशी और रहमत का आलम होता है। गुनाहगार भी अपने गुनाह दूर करने के लिए मस्जिदों का रुख करते हैं। यह महीना जहन्नुम से छुटकारे का महीना है। इस महीने के आगाज़ पर ही शरकस और शयातीन को कैद कर लिया जाता है। बंदों के अज्र और सवाब बढ़ा दिये जाते हैं। यह एक ऐसा महीना है कि हर इबादत के बदले रब बंदे को इनामात से नवाज़ता है।इस मुकद्दस महीने में अल्लाह को राज़ी करने का वो सारे काम बंदा करता है। जिससे अल्लाह और उसका रसूल खुश हो जाये। यह ऐसा महीना है जिसमें ऐसे मुसलमान जो पूरे साल कुरान की तेलावत नहीं करते वो तरावीह और शबीने के जरिये पूरी कुरान सुनते हैं। इस महीने में हमें ऐसा कोईकाम या हरकत नहीं करनी चाहिए जिससे किसी को कोई नुकसान हो, किसी का दिल दुखे, किसी को बुरा लगे। रमज़ान गुनाहों की माफी के साथ ही दुआओं की कबुलियत का भी महीना है और बंदे के दरजात इसमें बुलंद किये जाते हैं। सबसे पहले नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद (स.) ने रमज़ान का रोज़ा रखा था और अपनी उम्मत को इस महीने का रोज़ा रखने का हुक्म दिया। उन्होंने हदीस और कुरान जैसी पाक किताबों में कहा हैकि जो बंदा इस महीने का रोज़ा रखेगा उसके तमाम पिछले गुनाह माफ हो जायेंगे। रोज़ा रखने से बहुत से जिस्मानी और रूहानी फायदे हैं। मसलन नफ्स तकब्बुर, घमण्ड, बुख्ल जैसे बुरे एखलाक से पाक साफ हो जाता है। सब्र, जद्दोजेहद जो अपने नफ्स के साथ जेहाद करता है वो सब अल्लाह को राज़ी और उसकी खुश्बूदी हासिल करने के लिए है। ताकि रोज़दार अल्लाह के करीब हो जाये और उसकी जिंदगी बेहतरीन और खुशगवार हो जाये। ऐ अल्लाह हम सबकी रमज़ान की इबादत और रोज़ा कुबूल कर ले..आमीन।

          

            मौलाना अज़हरुल क़ादरी

{शिक्षक

, मदरसा खानमजान वाराणसी}

रविवार, 28 मार्च 2021

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ शबे बरात

इबादत में डूबे मोमिनीन,  अदा कि खास नमाज़े 

Varanasi (barkati news). सोशल डिस्टेंसिंग के साथ शबे बरात पर इतवार को अपनों बुजुर्गो की क्रबगाह पर अज़ीजों ने चिरागा किया उनके नाम पर शमां रौशन किया इस दौरान फातेहा पढ़ कर अज़ीज़ो कि मगफिरत की दुआएं मांग कर उन पर सवाब पहुंचाया गया। इस दौरान देर रात तक घरों में भी तमाम लोगो ने इबादत किया, फातेहा किया दुआए मगफिरत की। शहर के प्रमुख बुजुर्गो के रौज़ों, आस्तानों और मस्जिदों में ज़ायरीन का हुजुम इस बार दिखाई दिया, लोग देर रात तक इबादत करते दिखे। इबादत गुज़ार रात भर इबादत के बाद सोमवार को सहरी करके नफ्ल रोज़ा रखेंगे।


यहाँ लगाई हाज़िरी, किया ज़ियारत

बनारस शहर के प्रमुख कब्रिस्तानों में तमाम लोग अपने पुरखो कि कब्रगाह पर हाज़िरी लगाई, कब्रो कि ज़ियारत कि खास कर टकटकपुर, हुकुलगंज, भवनिया कब्रिस्तान गौरीगंज, बहादर शहीद कब्रिस्तान रविन्द्रपुरी, बजरडीहा का सोनबरसा कब्रिस्तान, जक्खा कब्रिस्तान, सोनपटिया कब्रिस्तान, बेनियाबाग स्थित रहीमशाह, दरगाहे फातमान, चौकाघाट, रेवड़ीतालाब, सरैया, जलालीपुरा, राजघाट, अलईपुरा समेत बड़ी बाजार, पीलीकोठी, पठानीटोला, पिपलानी कटरा, बादशाहबाग, फुलवरिया, लोहता, बड़ागांव, रामनगर आदि इलाक़ों की कब्रिस्तानों और दरगाहों में लोगों ने  हर साल पहुच कर शमां रौशन की। पिछ्ली बार लाक डाउन के चलते इन जगहो पर सन्नाटा पसरा था, लोगो ने घरो में फातेहा पढ़कर अज़ीज़ों की बक्शीश के लिए दुआएं मगफिरत मांगी थी। घरो में शबे बरात पर रौशनी का भी खास इंतेज़ाम किया गया था।  

घरों में लौटती है पुरखों की रूह 

मर्द ही नही घरों में ख्वातीन ने भी शबे बरात की रात इबादत की। इबादत में छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल थे। सुबह से शाम तक घरों में ख्वातीन हलवा शिरनी बनाने में जुटी हुई थी। शाम में वो भी इबादत में मशगूल हो गयी, शबे बरात से ही रुहानी साल शुरू होता है। इस रात रब फरिश्तों की डय़ूटी लगाता है। लोगों के नामे आमाल लिखे जाते हैं। किसे क्या मिलेगा, किसकी जिंदगी खत्म होगी, किसके लिये साल कैसा होगा, पूरे साल किसकी जिन्दगी में क्या उतार-चढ़ाव आयेगा। ये इसी रात लिखा जाता है साथ ही पुरखों की रूह अपने घरों में लौटती है जिसके चलते लोग घरों को पाक साफ रौशन रखते हैं।

हलवे की हुई घरों में फातेहा 

शबे बरात पर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में इस बार चहल-पहल दिखाई दी। सूरज डूबते ही घरों में लज़ीज़ हलवों, शर्बत, शिरनी की फातेहा का जो दौर शुरू हुआ वो मगरिब की नमाज़ के बाद से इशा की नमाज़ तक चलता रहा। फातेहा के बाद लोगों ने सदका निकाला, गरीबों और मिस्कीनों को खैरात निकाला और तबरुक लोगों में तकसीम किया। शबे बरात का सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों में दिखाई दे रहा था। सुबह से शाम तक घरों में ख्वातीन हलवा शिरनी बनाने में जुटी हुई थी। शाम में वो भी इबादत में मशगूल हो गयी, यह दौर दे रात तक चलता रहा।